Gender and climate are deeply interconnected, with women and girls often bearing a disproportionate share of the impacts of climate change
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Gender and climate are deeply interconnected, with women and girls often bearing a disproportionate share of the impacts of climate change
मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 में ग्राम पंचायतों की जल और वन संरक्षण पहल को राष्ट्रीय मंच मिला. स्थानीय समुदायों ने चेक डैम, तालाब और वृक्षारोपण जैसे प्रयासों से जलवायु चुनौतियों का समाधान पेश किया. इन मॉडलों ने दिखाया कि जमीनी स्तर पर की गई पहल पर्यावरण और आजीविका दोनों को मजबूत कर सकती है.
मुंबई में चल रहे क्लाइमेट वीक 2026 में झारखंड की सियारी पंचायत चर्चा का विषय बनी हुई है। पंचायत के मुखिया रामवृक्ष मुर्मु को अपनी पंचायत में सोलर एनर्जी और जलवायु अनुकूल विकास कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। मुर्मु ने विकास कार्यों में जलवायु समर्थ योजनाएं अपनाने की पहल को मुंबई में साझा किया। उन्होंने बताया कि अगर पंचायतों और मुखियाओं को जलवायु परिवर्तन के संबंध में जागरूक किया जाए तो स्थानीय नेतृत्व और सही योजना के जरिए छोटे-छोटे गांव भी कम कार्बन उत्सर्जन वाले और सुरक्षित आजीविका वाले भविष्य की दिशा में काम कर सकते हैं।
मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 के दौरान आयोजित विशेष पंचायत सत्र में देश के छह राज्यों के पंचायत प्रतिनिधियों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के अपने जमीनी अनुभव साझा किए और बताया कि टिकाऊ समाधान गांवों से ही आ रहे हैं।